शासन दुष्कर्म


Preamble

A friendly advice from a Supreme Court Lawyer to revolutionaries against NRC/CAA/NPR imposed by the government on people of India is to document all the irregularities by government and administrative officials for crushing the revolution by the people for use in judicial process against the erring officials when the present government is topled giving way to a truly democratic and secular government.

As a humble supporter of the revolution, I take the responsibility on myself to keep on recording the irregularities on this public page. Others may also do the same or collaborate with me by sending information in forms of texts, audios, videos, etc to me for keeping a record on this documentation.

Objective of the present government, to begin with, is to isolate Muslim population from others and prove them guilty of being refugees in India, hence putting them in detention camps for life.This religion-based step of the government being against secular spirit of Constitution of India is being opposed by all sections of Indian population, After Muslims are eliminated or weakened, next step of the government would be against Christians, then other religious minorities, and ultimately against all opposed to RSS plan to covert secular India into a Hindu Nation.


सर्वोच्च न्यायालय की एक विदुषी अधिवक्ता ने भारत के क्रांतिकारियों को परामर्श दिया है कि वे सरकारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही अनियमितताओं के प्रमाण एकत्र करते रहें ताकि समुचित समय आने पर दोषियों को दण्डित किये जाने के लिए उनके विरुद्ध न्यायालयी कार्यवाही की जा सके।

वर्तमान क्रांति का एक विनम्र समर्थक होने के कारण मैं इस प्रकार की अनियमितताओं के साक्ष्य इस गूगल डॉक्स पेज पर संग्रहित करने का दायित्व लेता हूँ -

अन्य साथी भी इस कार्य को स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं, अथवा अनियमितताओं की सूचना - पाठ्य, श्रव्य अथवा दृश्य भेजकर मेरे इस प्रयास में सहयोग कर सकते हैं।

वर्तमान सरकार का आरंभिक लक्ष्य मुस्लिम समुदाय को प्रताड़ित करना है जिसके बाद ईसाईयों एवंअन्य धार्मिक मतावलम्बियों के साथ भी ऐसा ही किया जाएगा जिसका अंत आरएसएस के सभी विरोधियों के विरुद्ध ऐसी ही कार्यवाही की जायेगी ताकि देश में केवल आरएसएस समर्थक ही शेष रहें.जिससे कि धर्म-निरपेक्ष भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जा सके.

आरोप १ - शपथ से विमुख

आरोप १ - शपथ से विमुख

प्रत्येक सांसद को संसद की सदस्यता हेतु भारत के संविधान के प्रति वफादार रहने की शपथ लेनी होती है, जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भी ली थी। इस के बाद ही और इसी आधार पर इन्होने केंद्र में सरकार बनायी जो अभी चल रही है।

भारत का संविधान धर्म-निरपेक्षता पर आधारित है, जिसके अनुसार सरकार नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर लाभ अथवा हानि नहीं पहुंचा सकती। किन्तु अमित शाह ने भारत के गृह मंत्री के रूप में अनेक बार भारत के मुस्लिमों के विरुद्ध व्यवहार किया है, जिसके लिए उसने नागरिकता संशोधन क़ानून बनाया (सी ए ए ) बनाया है एवं पूरे देश में नेशनल सिटीजनशिप रजिस्टर (एन आर सी) लागू करने का भी एलान किया है।

सी ए ए के अंतर्गत भारत सरकार पडोसी देशों के गैर-मुस्लिम नागरिकों को भारत की नागरिकता प्रदान करेगी एवं उनको भारत में बसायेगी। सरकार की नियत यह है कि पडोसी देशों के इन नागरिकों को भारत में उन स्थानों पर बसाया जाएगा जहां मुस्लिम जनसँख्या अधिक है।

एन आर सी के अंतर्गत सरकार पूरे देश में इसे लागू करके विदेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें सरकार द्वारा बनाये गए डिटेंशन कैम्पों में रखा जाएगा..अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता के जन्म के बारे में देना होगा कि वे भारत में ही उत्पन्न हुए थे। साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने यह बार बार कहा है कि इस व्यवस्था से गैर-मुस्लिमों के हितों की रक्षा की जायेगी किन्तु मुस्लिमों को नहीं बख्शा जाएगा। अतः यह व्यवस्था भी संविधान के धर्म निरपेक्ष स्वरुप के प्रतिकूल है।

इस व्यवस्था को असम में लागू किया गया जिसमें १,६०० करोड़ रुपये खर्च करके १९,००,००० लोगों को भारत की नागरिकता से वंचित किया गया जिनमें भारतीय सेना के सम्मानित सैनिक, पूर्व राष्ट्रपति फकरुद्दीन अहमद का परिवार भी सम्मिलित है। इसके बाद योजना को रद्द करके इसे दुबारा से लागू किया जा रहा है। इस व्यवस्था पर जितने धन की बर्बादी होगी वह अप्रत्याशित है, दूसरे इससे प्रत्येक नागरिक को एक संकट में दाल दिया जाएगा।

यहां मुझे भारत की एक आदर्श सांसद सुश्री महुआ मोइत्रा का संसद में दिया गया भाषण याद आता है - जिस देश में प्रधान मंत्री की शिक्षा सम्बंधित डिग्री नहीं मिल पा रही, निर्धन साधन विहीन लोगों को ७० वर्ष पुराण रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा जा रहा है।

धर्म के आधार पर विदेशी नागरिकों को नागरिकता प्रदान करना एवं मुस्लिमों को छोड़कर अन्य लोगों को नागरिकता की कसौटी में छूट देना भारत के धर्म निरपेक्ष संविधान के विरूद्ध है। इसलिए मोदी एवं शाह संविधान के प्रति वफादार ना होने के कारण संसद के सदस्य बने रहने योग्य नहीं हैं और न ही ये सरकार में बने रहने के योग्य हैं। इसी आधार पर ये दोनों देशद्रोही सिद्ध होते हैं।

आरोप 2 - मतदाता नागरिकता

मोदी-शाह सरकार की मान्यता है कि देश में जो मतदाता हैं उनकी नागरिकता संदिग्ध है। मतदाताओं को वोट डालने के लिए सरकार द्वारा मतदाता पहचान कार्ड प्रदान किया जाता रहा है जिसके आधार पर वे मताधिकार प्राप्त करते हैं और सरकार निर्माण हेतु अपने प्रतिनिधि चुनते हैं।

अब यदि मतदाता इस देश के नागरिक नहीं हैं तो सरकार ने उन्हें मतदाता पहचान पत्र क्यों और कैसे प्रदान किया, यदि वे नागरिक नहीं हैं तो वे मतदाता भी नहीं हो सकते। वैध मतदाता ना होने पर उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि भी अवैध हैं, और उन प्रतिनिधियों द्वारा बनायी गयी सरकार भी अवैध है।

अतः, देश के लोगों की नागरिकता की छानबीन करने से पहले, सरकार अपना स्तीफा दे, क्योंकि अवैध सरकार को नागरिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती।

सरकार की घोषणा है कि मतदाता पहचान पत्र नागरिकता का प्रमाण नहीं है, इसलिए अवैध सरकार द्वारा ऐसी घोषणा करने का भी अधिकार नहीं है। सरकार द्वारा प्रदान किया गया मतदाता पहचान पत्र ही लोगों की नागरिकता का प्राथमिक प्रमाण है।

सरकार ने यह भी घोषणा की है कि देश के लोगों को सरकार द्वारा दिए गए आधार कार्ड तथा पासपोर्ट भी नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं। यहां यह विचारणीय है कि आधार योजना नागरिकों की पहचान हेतु सरकार द्वारा नियोजित है, और मोदी सरकार ने २०१४-१९ सत्र में आधार योजना को स्थापित करने में ही व्यतीत किये, प्रत्येक व्यक्ति को अपना अस्तित्व सिद्ध करने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया। इस योजना पर करोड़ों में सार्वजनिक धन कजर्च किया गया। अतः सरकार को यह अधिकार नहीं है कि आधार योजना को निरस्त किये बिना इसे नागरिकता की पहचान स्वीकार ना करे। यदि सरकार इस योजना को निरस्त करती है तो इस पर खर्च किये गए सार्वजनिक धन के अपव्यय का दायित्व निर्धारित करे, एवं सम्बंधित अधिकारियों से उसे वसूल करे। इसकी वसूली के बाद ही देश के लोग आधार कार्ड को नागरिकता नई पहचान नहीं मानेंगे।

भारत सरकार द्वारा नागरिकों को जारी किया गया पासपोर्ट पूरे विश्व में उनकी भारत के नागरिक होने का अधिकृत प्रमाण है, यही समस्त विश्व की परिपाटी है। भारत सरकार द्वारा अपने द्वारा ही जारी किये गए पासपोर्ट को नागरिकता की पहचान ना मानना अंतर्राष्ट्रीय विधान का उल्लंघन है जिसे विश्व में कहीं भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। पासपोर्ट को नागरिकता की पहचान ना मानने से पहले सरकार विश्व को यह बताये की भारत की नागरिकता सिद्ध करने के लिए उसने दूसरा क्या उपाय किया है।

आरोप 3 - आर्थिक लूट

नरेंद्र मोदी द्वारा २०१४ में सरकार बनाने के बाद से ही भारत में आर्थिक मंदी का दौर आरम्भ हुआ जो विकराल रूप ले चूका है और आगे बढ़ता ही जा रहा है। देश की आर्थिक गतिशीलता हेतु संसाधनों में निवेश के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों के लिए धन की प्रचलन में उपस्थिति भी अनिवार्य होती है। यह नियम जितना देश पर लागू होता है उतना ही नागरिकों के व्यक्तिगत स्तर पर भी लागू है। व्यक्ति के पास सभी वांछित संसाधन हों किन्तु जेब खाली हो तो उसकी गतिविधियां मंद पड जाती हैं अतः वह अपने संसाधनों का विक्रय कर नकद धन पाने के प्रयास करने लगता है। मोदी सरकार भी आर्थिक स्तर पर अपनी सतत लापरवाहियों के कारण इसी स्थिति में पहुँच गयी हैं। देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तम्भ - सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, सरकार द्वारा बेचे जा रहे हैं अथवा उनमें निजी निवेश कराया जा रहा। है

बैंक घोटाले

मोदी सरकार का प्रथम कदम देश के सामान्य नागरिकों नागरिकों को आर्थिक मंदी में डुबोने हेतु जन-धन योजना था जिसके माध्यम से सरकार ने बैंकों में नए खाते खुलवाकर लोगों की जेबों से ११,००० करोड़ रूपया एकत्र किया और धनवान उद्यमियों में बाँट दिया।

इस योजना में धन जमा करने के बाद लोगों को रोजमर्रा के जीवन में वित्तीय कठिनाइयों से गुजरना पड़ा जिसके कारण लोगों इन खातों का उपयोग बंद कर दिया। लाखों खाते बैंकों द्वारा बंद कर दिए गए।

मोदी सरकार की दूसरी योजना नोटबंदी की थी जिसके अंतर्गत काला धन समाप्त करने के नाम पर ५०० और १००० के नोट बंद किये गए एवं २,००० के नोट का प्रचलन किया गया जो काले धन के प्रचलन में सहयोग हेतु किया गया। यह राष्ट्र एवं लोगों के विरुद्ध षड़यंत्र था। काले धन की समाप्ति उन ६०० से अधिक लोगों पर कार्यवाही से हो सकती थी जिनकी सूची सरकार के पास उपलब्ध थी।

व्यावसायिक बैंको के माध्यम से लोगों के पुराने नोट बदलवाए गए जिस दौरान लोगों के खातों से धन की निकासी सीमित की गयी। लोगों अपनी आवश्यकता पूर्ती के लिए बैंकों से अपना पैसा लेने में घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा जो ग्रामीण बैंकों में लगभग ६ महीने तक बनी रहीं। सौ से अधिक लोग बैंकों के द्वार पर लम्बी कतारों में अपना जीवन खो बैठे। इस योजना का लक्ष्य मोदी एवं शाह द्वारा धन कमाना था। शाह के अधीन गुजरात के ११ सहकारी बैंकों ने ३,००० करोड़ से अधिक धन के तथाकथित पुराने नोट रिज़र्व बैंक से बदले। रिज़र्व बैंक में जमा किये गए नोट नक़ली थे जो शाह के लिए छापे गए। इस प्रकार अमित शाह ने इस योजना से ३,००० करोड़ से अधिक सार्वजनिक धन लूटा।

इस योजना के दौरान देश की आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं क्योंकि उद्योग एवं व्यवसाय चलाने के वांछित धन उपलब्ध नहीं रहा। इससे भी देश को आर्थिक क्षति हुई, साथ ही भाजपा देश की सर्वाधिक पार्टी बन गयी।

मोदी-शाह द्वारा बैंकों के माध्यम से तीसरा घोटाला अपने ३० से अधिक मित्रों और सहयोगियों को सार्वजनिक बैंकों से विशाल मात्रा में ऋण दिलाना और उन्हें विदेश भेजना रहा है। इन ऋणों के लिए मोदी मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने बैंकों पर दवाब डाले एवं इन लोगों को विदेश गमन में सहायता की। इससे देश के अधिकाँश सार्वजनिक बैंक संकट में रहे।

फ़िज़ूलख़र्ची

प्रधान मंत्री बनते ही मोदी ने अपनी जीवन शैली में विशाल परिवर्तन किये जिनमें प्रधान मंत्री आवास का विस्तार, आवास से हवाई अड्डे तक सुरंग मार्ग. भोजन में काजू की चपाती आयातित मशरुम की सब्जी के साथ, हबीब के विशेषज्ञों द्वार नियमित केश सज्जा, प्रत्येक अवसर लिए नई वेशभूषा, भाषण के अतिरिक्त अन्य सभी कार्यों को तिलांजलि, विदेश यात्राएं, जन-संचार माध्यमों पर नियंत्रण, व्यक्तिगत छबि हेतु अत्यधिक विज्ञापन, आदि सम्मिलित हैं।

मूल प्रधान मंत्री आवास में आसपास के ५ अन्य मंत्री आवास मिलाकर उसे १२ एकड़ का विस्तार दिया गया जिसे पूरी तरह गुप्त रखा जा रहा। इस क्षेत्र के विभिन्न विभागों के लिए ५० प्रबंधक नियुक्त हैं, ५ डॉक्टर,नर्सें और दो एम्बुलेंस २४ घंटे तैयार स्थिति में उपलब्ध रहती हैं। नगर में यात्रा हेतु दो आयातित करें सदैव उपलब्ध रहती हैं जिन्हें प्रति वर्ष बदल दिया जाता है। अब एक ऐसा वायुयान बोइंग ७७७ - ३०० खरीद का आदेश दिया गया है जैसा कि राष्ट्रपति ओबामा प्रयोग करते थे.जो अमेरिका तक बीच में बिना ईंधन लिए जा सकता है एवं जिसमें मिसाइली हमले पर भी सुरक्षा बने रहने के साधन होंगे।

देश का कोई भी प्रधान मंत्री इस प्रकार का वैभवशाली जीवन नहीं जिया है, जिसका व्यक्तिगत व्यय करोड़ों रुपये प्रतिदिन है। इस पर भी वह निर्धन एवं फ़क़ीर होने का आडम्बर रचता रहता है। देश के लिए प्रतिदिन १८ घंटे काम करना प्रचारित करने वाला प्रधान मंत्री की व्यक्तिगत देखरेख में ही प्रतिदिन १० घंटे लग जाते हैं।

तुलना हेतु जान लें कि विश्व के संपन्न एवं सुखी देश नीदरलैंड के प्रधान मंत्री नगर में अपनी बाइसिकल से बिना सुरक्षा गार्डों के आते जाते हैं। यूरोप के अनेक संपन्न देशों में सांसदों एवं मंत्रियों को कोई वेतन एवं भत्ता नहीं दिया जाता।

प्रधान मंत्री ने २०१४ से २०१९ तक ९५ विदेश यात्राएं की जितनी विश्व भर में किसी राष्ट्राध्यक्ष ने नहीं कीं। इन यात्राओं पर लगभग ३ अरब रुपये के प्रत्यक्ष व्यय का अनुमान है। ये यात्राएं औसतन ३ दिन प्रत्येक की रहीं, इस प्रकार उसने ५ वर्ष के कार्यकाल में से लगभग एक वर्ष विदेशों में व्यतीत किया। यहां तक कि भारतीय फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा से मिलने के लिए प्रधान मंत्री बर्लिन गए और उसी दिन शाम को प्रियंका मोदी से दिल्ली में मिली। मोदी शासन के प्रथम ४ वर्षों में की गयी ८४ विदेश यात्राओं में १,४८४ करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष खर्चा हुआ।

अपनी व्यक्तिगत छवि के लिए मोदी ने अमेरिका में टेक्सास के हॉस्टन नगर में 22 सितम्बर 2019 को हाउड़ी मोदी प्रोग्राम का आयोजन किया जिसके लिए आरएसएस के ८,००० कार्यकर्ताओं को ले जाया गया, एक विशालतम स्टेडियम बुक करके उसमें सजावट की गयी। वहाँ ५०,००० लोगों को भोजन कराया गया। लगभग एक घंटे के मुख्य कार्यक्रम में मोदी ने ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार का नारा देकर ट्रम्प का चुनावी प्रचार किया और भारत के बारे में सफ़ेद झूठ बोला - सब चंगा सी। इस कार्यक्रम पर 1.45 लाख करोड़ रूपया खर्च किया गया।

मोदी शासन से पहले भाजपा कार्यालय किराए के भवनों में चल रहे थे किन्तु अब केंद्र से लेकर जनपद स्तर तक सुविधा-संपन्न भवन बना दिए गए हैं, जिनमें ८०० करोड़ रुपये लगत से बना दिल्ली का भाजपा मुख्यालय भी सम्मिलित है। कहने को तो कहा जाएगा कि भाजपा के ये भवन पार्टी फण्ड से बनाये गए हैं, ना कि सारवजनिक धन से किन्तु पार्टी के पास अचानक इतना धन आया कहाँ से जिससे वह भारत की सर्वाधिक धनवान पार्टी बन गयी? वास्तव में अवैध तरीकों से सार्वजनिक धन को पार्टी का धन बना कर ही उसे धनवान बनाया गया.

अकेले मोदी की सुरक्षा पर विगत वर्ष २०१९-२० में ५४० करोड़ रुपये खर्च हुए, बजट २०२०-२१ में यह राशि ६०० करोड़ कर दी गयी है।

जन-संचार माध्यम नियंत्रण

मोदी ने सरकार बनाते ही जन-संचार माध्यमों - समाचार पत्र-पत्रिकाएं, टीवी चैनल, आदि को अपनी छवि विकसित करने हेतु एवं दोषों पर पर्दा डालने हेतु अपने नियंत्रण में लेना आरम्भ कर दिया। इनमें से अधिकाँश माध्यम बड़े व्यावसायिक घरानों के स्वामित्व में है, जिनसे मोदी वैसे भी घनिष्ठ सम्बन्ध रखता रहा है। इन माध्यमों को भरपूर विज्ञापन दिए जिससे ये माध्यम मोदी सरकार के बारे में जनता को भ्रमित करते रहे, देश लुटाता रहा और मोदी का सितारा चमकता रहा।

सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामाजिक कार्यकर्ता रामवीर तंवर को प्राप्त सूचना के अनुसार विगत कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने १० वर्षों में जितना धन खर्च किया, उतना धन मोदी सरकार ने चार वर्ष में ही कर दिया था।

आर्थिक लूट के सन्दर्भ में कुछ प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं, यथा -

१.भारत में प्राचीन काल से ही मूर्ती निर्माण की कला विकसित रही है, आज भी भारत में मेधावी मूर्तिकार हैं. इस पर भी मेक इन इंडिया के पक्षधर ने सरदार पटेल की मूर्ती चीन से क्यों बनवाई?

२.राफेल समझौते के ऐसा क्या विशेष घटा कि फ्रांस सरकार ने अम्बानी समूह की कंपनी पर बकाया करोड़ों रुपये का टैक्स वसूलने की कार्यवाही बंद कर दी ?

३.सामान्यतःविदेश मंत्रालय ही सभी देशों से संबंधों की देखरेख करता है, मोदी शासन में जापान के साथ भारत के संबंधों में ऐसा क्या विशेष रहा है कि जापान सामान्य सीधे प्रधान मंत्री कार्यालय के अंतर्गत रखे गए? यहां यह जान लें कि चुनावों में प्रयोग की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की चिप जापान में ही निर्मित होती है, जिनके दुरूपयोग से ही भाजपा ने २०१९ में चुनावी जीत हासिल की. मोदी के इस छल का मक़सद देश की सत्ता पर अधिकार रखते हुए लूट को जारी रखना है.

आरोप ४ - समाज- कण्टकों को संरक्षण

गुजरात में मोदी-शाह जोड़ी मुख्यामंत्री एवं गृह मंत्री रह चुके हैं, जहां इनके अपराद उजागर हुए थे, यहां तक कि अमित शाह को तो कारागार में रहने का दण्ड मिला था और गुजरात में प्रवेश पर भी न्यायिक पाबंदी लगाई गयी थी। तभी से इनके सम्बन्ध समाज-कंटकों से बने हुए हैं जिन्हें ये संरक्षण देते रहे हैं। यह स्थिति और भी अधिक घातक हो जाती है जब न्यायिक अधिकारी भी इनके नियंत्रण में कार्य करने लगते हैं। इसका एक सटीक उदाहरण अभी सामने आया है -

वर्ष २००२ में मोदी-शाह द्वारा शासित गुजरात में भयावह दंगे हुए थे जिनके जनक ये दोनों ही थे। उन दंगों में इनके अनुयायियों ने आगजनी की थी जिसमें ३३ मुसलमान जीवित जला दिए गए थे। १७ दोषियों को न्यायलय द्वारा आजीवन कारावास का दंड दिया गया था। जनुअरी २०२० में मोदी-शाह द्वारा केंद्र में शासन के कारण इन १७ अपराधियों को जमानत पर मुक्त कर दिया गया है।

भाजपा सरकार के एक पूर्व मंत्री चिन्मयानंद अपने अधीन महाविद्यालय की विधि की स्नातकोत्तर छात्रा का लम्बे समय तक यौन शोषण करता रहा और उससे नग्न अवस्था में मालिश भी करवाता रहा। इस सब के ४० से अधिक वीडियो साक्ष्य छात्र ने न्यायलय को सौंपे। चिन्मयानंद को गिरफ्तार किया गया और वातानुकूलित सुविधा संपन्न अस्पताल में रखा गया एवं अब जनवरी २०२० में उसे जमानत पर मुक्त कर दिया गया है। इसके विपरीत पीड़ित छात्रा को चिन्मयानंद की शिकायत पर कारागार में डाल दिया गया है। चिन्मयानंद की यह सहायता मोदी, शाह और योगी द्वारा की गयी है। चिन्मयानंद की जमानत पर सत्ताधारी दाल द्वारा सार्वजनिक रूप से जश्न मनाये जा रहे हैं। इससे सिद्ध होता है कि सत्ताधारी लोगों का किस स्तर तक नैतिक पतन हो चुका है।

मोदी-शाह युगल को उच्च स्तरीय शिक्षा संस्थानों के कुशल संचालन से प्राकृत चिढ है जिसके कारण इन्होने केंद्र में सत्ता संभालते ही दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिआ मिलिया इस्लामिआ पर आक्रमण आरम्भ कर दिए। यहां तक कि छात्रा हॉस्टल कक्षों, टॉयलेटों, पुस्तकालय, आदि स्थानों में छात्रों पर आक्रमण किये गए, जिनके वीडियो साक्ष्य दिल्ली पुलिस के पास हैं, तब भी किसी के भी विरद्ध कोई पुलिस कार्यवाही नहीं की गयी है क्योंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्री अमित शाह के अधीन है।

मोदी-शाह द्वारा देश में नागरिकता संशोधन क़ानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर लागू किये जाने के विरोध में देश भर में धरने दिए जा रहे हैं जिनमें महिलाओं की विशेष भूमिका है। विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण हो रहे हैं। तथापि इन विरोधों को बदनाम करने एवं विरोधियों को भयभीत करने के लिए इन पर दिल्ली पुलिस की उपस्थिति में गोली चलाई गयी, इस मामले में भी दोषी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी क्योंकि वह आरएसएस का कार्यकर्ता है।

आरोप ५ - गाँधी बनाम गोडसे

गाँधी और सुभाष के सतत प्रयासों से भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ादी मिली, जिसका विरोध आरएसएस द्वारा किया जाता रहा था . यहाँ तक कि आरएसएस के प्रमुख व्यक्ति सावरकर की गवाही के आधार पर ही भगत सिंह को फांसी दी गयी थी सावरकर के शिष्य नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1950 को गाँधी जी गोली मारकर हत्या की थी . इससे देश दो धडों में बँट गया था - गांधीवादी और गाँधी-हत्यारे .आज की भाजपा गाँधी-हत्यारों की राजनैतिक पार्टी है, जिसके इस समय प्रमुख कर्त्ता नरेन्द्र मोदी एवं अमित शाह हैं .जो गाँधी ह्त्या के आज भी समर्थक हैं .

देश के नेताओं और लोगों ने गाँधी को सदैव बापू संबोधन से सम्मानित किया है जिन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि भी दी है . आरएसएस के अनुयायियों के अतिरिक्त देश में गाँधी के आलोचक हो सकते हैं, किन्तु कोई भी उनकी हत्या का समर्थन नहीं करता है। गाँधी को राष्ट्रपिता कहे जाने पर भी आरएसएस के अलावा कोई अन्य विरोधी नहीं है .अतः देश के लोग आज भी गांधीवादी और गाँधी-हत्यारों में बंटा हुआ है।

गाँधी हत्या और भगत सिंह को फांसी जैसे घिनौने कृत्यों में सावरकर की अहम् भूमिका रही थी। गोडसे सावरकर का अनुयायी और उसकी योजनाओं का कर्त्ता था। गाँधी हत्या सावरकर की योजनानुसार गोडसे द्वारा की गयी थी। .

नरेन्द्र मोदी दिल से गोडसे भक्त है, किन्तु राजनैतिक सत्ता हासिल करने के लिए गाँधी के सम्मान का आडम्बर रचता रहा है, जो देश के लोगों के साथ धोखाधड़ी है . मोदी एक और गाँधी को नमन करता है, वहीं दूसरी ओर वह सावरकर को फूलमाला पहना कर गोडसे द्वारा गाँधी हत्या का समर्थन करता है। मोदी-शाह चरित्र का यही असली रूप है।

https://www.firstpost.com/india/modi-wants-them-all-godse-and-gandhi-together-under-bjps-big-tent-2001055.html

आरोप ६ - २०१९ चुनाव हेराफेरी, सरकार अवैध

वर्ष २०१४ से २०१९ के मोदी शासन से भारत की जनता इतनी निराश हो गयी थी कि २०१९ के संसदीय चुनाव में भाजपा की विजय की कोई आशा नहीं थी। किन्तु सत्ता के बल पर इस चुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में घोषित किये गए जिसके आधार पर मोदी पुनः प्रधान मंत्री पद आसीन हुआ जो भारत का कटुतम दुर्भाग्य सिद्ध हुआ है। चुनाव परिणाम चुनाव आयोग द्वारा पूरी तरह प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त मतों में हेराफेरी से प्रभावित किये गए, जिसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोरा ने भाजपा के दलाल के रूप में कार्य किया। चुनाव के बाद स्ट्रोंग रूमों में वोटिंग मशीनों की अदला-बदली का गयी, जिसके लिए चुनाव आयोग द्वारा खरीदी गयी लगभग १९ लाख मशीनों का उपयोग किया गया, आयोग ने इन मशीनों को अपने रिकॉर्ड से अलग रखा हुआ था .

वोटिंग मशीनों की इस अदला-बदली का परिणाम यह हुआ कि ३०३ संसदीय क्षेत्रों के परिणामों में गिनी गयी वोटों की संख्या कुल डाली गयी वोटों से भिन्न थी. इसके कारण चुनाव आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर डाले गए परिणाम मिटा दिए जिसके बाद उनका कभी प्रकाशन नहीं किया गया, इस प्रकार २०१९ संसदीय चुनावों के परिणाम पूर्ण रूप से घोषित नहीं किये गए। आधे-अधूरे घोषित चुनाव परिणामों के आधार पर गठित सरकार भी अवैध है। भारत की राजनैतिक सत्ता पर इस समय अवैध कब्ज़ा किया गया है।

भाजपा के सत्ता में रहने से न्यायपालिका भी स्वतंत्र नहीं रही, जिसके कारण उपरोक्त १९ लाख वोटिंग मशीनों की खरीदारी का रिकॉर्ड ना रखे जाने के विषय में मनोरंजन रॉय की २०१३ की मुंबई कोर्ट में याचिका पर अभी तक कोई निर्णय नहीं किया गया है.

आरोप ७ - कोरोना प्रसार और आर्थिक घोटाला

प्रधान मंत्री की मूर्खता के कारण कोरोना वायरस नियंत्रण के बाहर जा चुका है, २१ दिन का लोक आयूत बिना किसी तयारी के शुरू किया गया जिससे लाभ कम हानि अधिक हुई है. जनता की सुरक्षा के उपाय तो दूर, इस की रोकथाम में लगे स्टाफ को आवश्यक औषधियां और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराये गए हैं वायरस के प्रभाव का कोई कारगर परीक्षण नहीं किया जा रहा है, इसके लिए आवश्यक सामान उपलब्ध ही नहीं है .विष प्रसार होता जा रहा है, लोग मरते जा रहे हैं, शासन-प्रशासन मौज में है .

पूरे देश की अर्थव्यवस्था मजदूरों पर निर्भर होती है जो अपने घरबार छोड़कर जरुरत के अनुसार देश के उद्योगों को चलाते हैं. इसलिए वे शहरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग होते हैं, जिस तथ्य को प्रधान मंत्री ने कभी जाना ही नहीं. इन लोगों की समस्या पर ध्यान दिए बिना लॉक डाउन घोषित कर दिया गया, जिससे शहरों में बसे लाखों मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए - कैसे जियेंगे ये २१ दिन बिना रोजगार के, इस पर मोदी ने कोई विचार ही नहीं किया.परिणाम स्वरुप लाखों मजदूर अपने अपने घर जाने को विवश हो गए जब की सभी यातायात सुविधाएं बंद कर दी गयी थीं. लोग अपने परिवारों और जरूरी सामान के साथ पैदल ही चल दिए सेकड़ों मील दूर अपने घरों को. उनके पास खाने पीने और रास्ते में ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है. सैकड़ों लोग और उनके बच्चे रास्ते में ही नृत्यु का ग्रास बन गए. इन विवश लोगों की अनियंत्रित भीड़ ने कोरोना वायरस प्रसार में सहायता की ,

प्रधान मंत्री ने कोरोना की राष्ट्रीय आपदा को भी अपने लाभ का व्यवसाय बना लिया/ है. प्रशन मंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष के रहते हुए भी एक नया ट्रस्ट बना कर दानदाताओं से उसमें दान लेना आरम्भ कर दिया है, ताकि इस धन पर प्र्म्पड़ी का व्यक्तिगत नियंत्रण रहे, जनता इसके उपयोग पर कोई प्रश्न ना कर सके. इस प्रकार एक राष्ट्रीय संपदा मोदी की निजी संपदा बना दी गयी है जिसका दुरूपयोग किया जाना निश्चित है .इस विषय पर जब प्रश्न उठने लगे तो सत्ता पक्ष ने कोरोना वायरस प्रसार को साम्प्रदायिक रंग दे दिया कि वोइरुस का प्रसार निजामुद्दीन क्षेत्र में हुए इस्लामी मरकज़ के कारण हुआ जबकि सभी उपलब्ध तथ्य इसके विपरीत हैं -

कोरोना का प्रथम रोगी २९ जनवरी को पा लिया गया था जिसपर २२ मार्च के ताली बजाओ, थाली बजाओ प्रदर्शन तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी, ना ही वायरस की रोकथाम अथवा उपचार की कोई तैयारी नहीं की गयी, उए समय सरकार दिल्ली में दंगे करवा मुस्लिमों की हत्या और उन्ही पर आरोप लगाने में व्यस्त रही .

निजामुद्दीन मरकज पूरी तरह सरकार से अनुमति लेकर सभी नियमों का पालन करते हुए संपन्न हुआ किन्तु सरकार ने वहां से लोगों के जाने लिए उचित संसाधनों की अनुमति नहीं दी.

कोरोना प्रसार और मोदी स्वार्थ

कोरोना से युद्ध में भारत बाजी हार चुका है जिसके लिए मोदी और मोदी सरकार जिम्मेदार है .

देश में कोरोना का प्राथमिक प्रसार विदेशों में रहने वाले उन भारतीयों द्वारा किया गया जिन्हें सरकार द्वारा विशेष वायुयानों से लाया गया और बिना किसी परीक्षण के देश भर में कोरोना विष प्रसार के लिए मुक्त छोड़ दिया गया .

२४ मार्च से आरम्भ होने वाले लॉक-डाउन की अचानक घोषणा ने देश के लगभग 6 लाख मजदूरों के समक्ष जीवित रहने का संकट खडा कर दिया जिससे वे छटपटाहट में बिना संसाधनों के अपने घरों की और निकल पड़े . जीवन मरण के इस संघर्ष में इन मजदूरों को कोई दोष नहीं दिया जा सकता, भूख प्यास, हताशा और भय से परास्त ये लोग अपने जरूरी सामान और परिवारों के साथ सैकड़ों मीलों की अपनी यात्रा पर पैदल ही निकल पड़ना इनकी मजबूरी थी क्योंकि सरकार ने यातायात के सभी साधन बंद कर दिए थे . इनकी अनियंत्रित भीड़ कोरोना प्रसार का दूसरा स्रोत है जिसके लिए तानाशाह मोदी और मोदी सर्कार दोषी है .

लॉक-डाउन आरम्भ होने के बाद उत्तर प्रदेश के अनुशासनहीन मुख्यमंत्री का अयोध्या में रामनवमी समारोह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री का विवाह समारोह में सम्मिलित होना और भाजपा के अनेक पदाधिकारियों के विशेष समागम कोरोना प्रसार के तीसरे बड़े कारण हैं.

अपनी लगातार की लापरवाही एवं पराजय के लिए मोदी मंडली ने जो निजामुद्दीन मरकज पर जो आरोप लगाया है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है, वहां सब कुछ सरकार की अनुमति से एवं लापरवाही के कारण हुआ था .

धनवानों के साए में और उनके विकास को समर्पित मोदी सरकार को निर्धनों से घोर नफ़रत रही है, और सरकार यह भी जानती है की देश पर जो भी संकट आता है उसमें निर्धन ही मरते हैं . पुलिस द्वारा इन निर्धन, विवश, भयभीत भूखे प्यासे लोगों की निर्मम पिटाई मोदी षड़यंत्र का प्रमाण है .अतः यह संभव है कि भारत को निर्धनों से मुक्त करने के लिए कोरोना का प्रसार होने दिया हो, इस प्रस्सर में मोदी का आर्थिक स्वार्थ भी निहित है .

कोरोना से बचाव के नाम पर मोदी ने लोगों से दान देने की अपील की है किन्तु यह अपील देश के पूर्व निर्धारित एवं अधिकृत प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में धन देने हेतु न होकर मोदी के नवनिर्मित निजी ट्रस्ट मोदी-केयर में दान देने के लिए है जिसपर जनता का कोई हसक्षेप नहीं होगा जिससे मोदी द्वारा इस कोष में प्राप्त धन का स्वेच्छ से दुरूपयोग किया जा सकेगा . . ,

कहाँ बह रहा है देश के परिश्रमी निर्धनों का धन

दिन रात परिश्रम करके भी भारत के किसान और मजदूर परेशान हैं, और अधिक निर्धन हो रहे हैं, मोदी शासन में, आखिर कहाँ जा रहा है उनकी कम्मी का धन. आइये कुछ सच्चाई पाने की कोशिश करते हैं -

ज्ञात हुआ है कि एक संबित पत्रा जिसे गलत इलाज करने के कारण डॉक्टर बने रहने से वंचित कर दिया गया, आज भाजपा का प्रवक्ता है २०१४ से. उसी समय से सरकारी बहुमूल्य प्रतिष्ठान ओ एन जी सी का निदेशक भी नियुक्त कर दिया गया. २०१४ तक ओ एन जी सी के रिज़र्व 10,000 करोड़ से अधिक थे जो धीरे धीरे घटते हुए शून्य स्तर पर आ गए हैं .२०१९ में पत्रा को ओ एन जी सी का चेयरमैन बना दिया गया, वेतन निर्धारित किया गया रु 27,00,000 प्रति माह . पत्रा ने ओ एन जी सी के लिए आज तक कोई काम नहीं किया और ना ही कर सकता है अपनी निपट मूर्खता के कारण .बस विपक्षियों को गाली बकना उसका काम है .सर्वोच्च न्यायलय ने पात्रा के वेतन और कार्य पर सरकार को नोटिस दिया है. आशा है मामले को कुछ ले दे कर निबटा लिया जाएगा, .

मोदी मंत्रालय में ५७ मंत्री हैं, कितु दो-तीन मंत्रियों के अतिरिक्त किसी के पास कोई काम नहीं है करने के लिए, ना ही जनता को उनके किसी काम की जानकारी है .इन मंत्रियों के औसत वेतन-भत्ते और दूसरे खर्चे रु 10,00,000 प्रति व्यक्ति प्रति माह है इस प्रकार सार्वजनिक धन से लगभग रु 6 करोड़ इन अकर्मण्य मंत्रियों के खातों में चला जाता है .

प्रधान मंत्री मोदी के खर्चे सर्वाधिक आश्चर्यजनक हैं -

5 मंत्री स्तर के विशाल भवनों को मिलाकर बनाया गया १२ एकड़ में फैले भवनों का समूह जिसके प्रबंधन के लिए 50 उच्च वेतनभोगी प्रबंधक नियुक्त हैं.जिनके अधीन लगभग २०० कर्मचारी देखरेख के लिए नियुक्त हैं . चालकों सहित 5 कारें, 5 डॉक्टर और दर्ज़नों नर्सें २४ घंटे निवास पर उपलब्ध रहते हैं .

भोजन में काजू की चपाती, 3 आयातित मशरूम की सब्जी के साथ, प्रत्येक मशरूम का मूल्य ८,000 रुपये.

प्रत्येक अवसर के लिए एक नयी वेशभूषा जिसे एक अमेरिकन कंपनी के विशेषज्ञों द्वारा तैयार लिया जाता है, प्रत्येक वेशभूषा केवल एक बार ही उपयोग में ली जाती है, औसतन प्रत्येक दिन 5 वेशभूषाओं की आवश्यकता होती है. चश्मा, पेन, आदि सब आयातित, प्रत्येक वस्तु की कीमत लाखों में,

कहने को कहा जा रहा है कि प्रधान मंत्री भोजन एवं वस्त्रों पर खर्चा निजी स्तर पर करते हैं, जिनका वेतम मात्र 2,00,000 रुपये प्रति माह है और भोजन एवं वस्त्रों पर औसत खर्चा लगभग 20,00,000 रुपये प्रतिदिन .

प्रधान मंत्री सुरक्षा पर 1.६२ करोड़ रुपये प्रतिदिन, साथ ही स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था अतिरिक्त. . .

परिश्रमी लोग और अय्याश सरकार

भारत सरकार ने 1 अरब डॉलर का कर्जा विश्व बैंक से लिया है - कोरोना संकट के बहाने, इसमें से कुछ महिला बैंक खातों में 500 - 500 रुपये भेजा गया है, कुछ मनरेगा खातों में 1000-1000 भेजा गया है - लॉक-डाउन अवधि में गुजारे हेतु, इससे स्वयं अपने भोजन और वस्त्रों पर 10,00,000 रुपये प्रतिदिन खर्च करने वाला व्यक्ति लोगों को अपनी मानसिक औकात दिखा रहा है.

मोदी-केयर्स में दान लगभग १०,००० करोड़ पहुँच गया है जो मोदी का निजी धन हो गया है,

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन से एक दिन का वेतन बलात काटा जा रहा है, उनकी वेतन एवं पेंशन वृद्धि पर रोक लगा दी गयी है, क्योंकि सरकार के पास धन का अभाव है. किन्तु मोदी मंत्रालय में लगभग 50 मंत्री हैं, इतने ही निगमों के अध्यक्ष हैं, जिनके पास कोई काम नहीं है, अपने वेतनों के हिसाब रखने के सिवाय, इनमें से प्रत्येक पर औसतन १०,००,००० रुपये प्रति माह खर्च किया जा रहा है. परन्तु इनसे कोई वसूली नहीं की जा रही है, देश में लगभग 5,000 संसद एवं विधान सभाओं के सदस्य हैं, इन्हें भी निर्धन वर्ग मान लिया गया है जब कि प्रत्येक का बाज़ार भाव 40 /50 करोड़ रुपये है. प्रत्येक पर औसतन सार्वजनिक संपदा से लगभग 10,00,000 प्रति माह खर्च किया जा रहा है.

मोदी सरकार द्वारा रिज़र्व बैंक को लगातार बलि का बकरा बनाया जा रहा है - उसके रिज़र्व कोष पर पूर्व किसी सरकार ने कभी युद्ध स्धिति में भी डाका नहीं डाला था, किन्तु मोदी सरकार ने पहले 75,000 करोड़ प्राप्त करने का अधिकार लिया, उसे उड़ाने के बाद यह सीमा 1,20,000 करोड़ कर दी गयी, उसे भी उड़ा दिया गया, अब यह सीमा 2,00,000 करोड़ कर ली है, सरकार तब भी गरीब है,

विदेशों में रहने वाले 15,00,000 वैभवशाली भारतीयों को विशेष विमानों से भारत लाकर मुक्त छोड़ दिया गया जो भारत में कोरोना संकट लाये और फैलाए. हरिद्वार में मौज उड़ाने वाले 9,000 गुजरातियों को उत्तराखंड परिवहन की विशेष बसों द्वारा उनके घर पहुंचाया गया. और जब 6,00,000 श्रमिकों को लोक-डाउन के कारण अपने घर जाने की जरूरत हुई तब रेल और बस सेवाएं बंद कर दी गयीं, महिलाओं और बच्चों सहित भूखे-प्यासे सैकड़ों मील पैदल जाने को लाचार लोगों की रास्तों में नित्यप्रति मौतें हो रही हैं, सरकार में बैठे लोग मौज कर रहे हैं.

कैसे डुबाया जा रहा है भारत ?

कोरोना संकट जारी है, लोग मर रहे हैं भूखे प्यासे, घरों में और सड़कों पर. कोरोना संकट से उबरने के लिए सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है, मोदी को बस चिंता है - PMCARES में प्राप्त दान अपनी अय्याशियों के लिए बचाया जाए. संकट काल में भी प्रत्येक खरीदारी में घोटाला किया जा रहा है - घटिया टेस्ट किट जिनका रेट लगभग २२५ रुपये है ६०० रुपये की दर से खरीदी गयीं. मामला खुल गया तब खरीदारी आदेश निरस्त किया गया. कोरोना संकट में टेस्ट ही सबसे महत्वपूर्ण है जो भारत में नगण्य ही किये जा रहे हैं.

सरकार की प्राथमिकताएं -

86,600 करोड़ रुपये चोकसी जैसे 50 चोर उचक्कों की क़र्ज़ माफी, अब वे सभी आरोपों से मुक्त हैं, भारत लौट सकते हैं, मोदी के साथ मिलकर सार्वजनिक धन को फिर से लूट सकते हैं.

20,000 करोड़ रुपये आसपास की सजावट के साथ प्रधान मंत्री के लिए नया आवास, भारत का शहंशाह बनना है मोदी को.

8,458 करोड़ रुपये में प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति के लिए दो विशेष विमान.

विश्व बैंक से 1 अरब डॉलर का कर्जा लिया जा चुका है, अब 2 अरब और लेने की तैयारी है, कोरोना के नाम पर लिए गए कर्ज को व्यक्तिगत वैभव के लिए खर्च किया जा रहा है .

विरोधियों को कारागारों में डाला जाना जारी है, कश्मीर अभी भी कारागार बना हुआ है.

नफ़रत का सरकारी धंधा जोरों पर है.